डीबीटी(DBT) खाद प्रणाली और आईएफएमएमएस(IFMMS) क्या है? किसान और दुकानदार के लिए आसान भाषा में

डीबीटी खाद प्रणाली और आईएफएमएमएस से किसान, दुकानदार, कंपनी और सरकार को मिलने वाले फायदे


आज के समय में खाद की बिक्री और वितरण दो मुख्य व्यवस्थाओं पर चल रहा है –

डीबीटी(DBT) खाद प्रणाली और आईएफएमएमएस(IFMMS) पोर्टल।

इन दोनों का मकसद है कि सरकार की दी जाने वाली सब्सिडी सही जगह पहुंचे और खाद की कालाबाजारी रोकी जा सके।

इस लेख में हम समझेंगे कि डीबीटी खाद प्रणाली और आईएफएमएमएस क्या है, यह कैसे काम करता है और इसका फायदा किसे मिलता है।

DBT खाद प्रणाली क्या है?

DBT का मतलब होता है – सीधे लाभ का हस्तांतरण।

खाद के मामले में इसका मतलब यह है कि सरकार खाद पर जो सब्सिडी देती है, वह सीधे किसान को नहीं बल्कि खाद बनाने वाली कंपनी को तब मिलती है, जब किसान सच में खाद खरीद लेता है।

जब किसान दुकान पर जाकर खाद लेता है और आधार कार्ड व अंगूठे की पहचान से उसकी एंट्री मशीन में होती है, तभी यह माना जाता है कि खाद की असली बिक्री हुई है।

उसी बिक्री के आधार पर सरकार कंपनी को सब्सिडी देती है।

इसका सीधा मतलब यह हुआ कि बिना किसान के खाद खरीदे, कंपनी को सब्सिडी नहीं मिल सकती।

पहले व्यवस्था कैसी थी?

पहले कंपनियों को पहले ही सब्सिडी मिल जाती थी।

इस कारण कई जगह फर्जी बिक्री दिखाई जाती थी।

कागजों में खाद बिक जाती थी लेकिन असल में किसान तक नहीं पहुंचती थी।

इससे सरकार का पैसा भी बर्बाद होता था और किसान को भी सही समय पर खाद नहीं मिलती थी।

इसी गड़बड़ी को रोकने के लिए डीबीटी खाद प्रणाली लाई गई।

आईएफएमएमएस(IFMMS) पोर्टल क्या है?

आईएफएमएमएस का मतलब है – एकीकृत खाद प्रबंधन प्रणाली।

यह सरकार का एक पोर्टल है, जिसमें खाद का पूरा हिसाब रखा जाता है।

इस पोर्टल में यह जानकारी रहती है कि:

– कंपनी ने कितनी खाद बनाई

– किस जिले में कितनी खाद भेजी

– किस दुकानदार के पास कितना स्टॉक है

– कितनी खाद बिक चुकी है

यानि खाद का पूरा रास्ता कंपनी से लेकर किसान तक इसी पोर्टल में दिखाई देता है।

खाद का रास्ता कैसे चलता है?

सबसे पहले खाद बनाने वाली कंपनी अपने पोर्टल में स्टॉक डालती है।

फिर वह स्टॉक अपने वितरक (डिस्ट्रीब्यूटर) को भेजती है।

डिस्ट्रीब्यूटर अपने पोर्टल में स्टॉक दर्ज करता है।

इसके बाद वह स्टॉक थोक विक्रेता को देता है।

थोक विक्रेता से वह स्टॉक खुदरा दुकानदार तक पहुंचता है।

जब दुकानदार किसान को खाद देता है, तब मशीन में किसान का आधार और अंगूठा लगाकर बिक्री दर्ज की जाती है।

उसी बिक्री के आधार पर कंपनी को सरकार से सब्सिडी मिलती है।

DBT FERTILIZER KYA HAI


किसान को इसका क्या फायदा है?

किसान को फायदा यह है कि:-

– नकली खाद मिलने की संभावना कम होती है

– सही दाम पर खाद मिलती है

– खाद की कालाबाजारी कम होती है

– यह पता चलता है कि उसने कितनी खाद ली है

किसान को अब यह भरोसा रहता है कि खाद सरकार की निगरानी में मिल रही है।

दुकानदार को इसका क्या फायदा है?

दुकानदार को फायदा यह है कि:-

– उसका स्टॉक सही तरीके से दर्ज रहता है

– उस पर फर्जी बिक्री का आरोप नहीं लगता

– सब कुछ रिकॉर्ड में रहता है

– विभाग को जवाब देना आसान होता है

लेकिन दुकानदार को मशीन चलाने, इंटरनेट और अंगूठा पहचान में परेशानी भी होती है।

कंपनी को इसका क्या फायदा है?

कंपनी को फायदा यह है कि:-

– उसे सही बिक्री का आंकड़ा मिलता है

– सब्सिडी सही समय पर मिलती है

– फर्जी रिकॉर्ड बंद हो जाते हैं

– माल की योजना बनाना आसान हो जाता है

सरकार ने यह व्यवस्था क्यों बनाई?

सरकार ने यह व्यवस्था इसलिए बनाई ताकि:-

1. खाद की कालाबाजारी रोकी जा सके

2. सब्सिडी का पैसा बर्बाद न हो

3. असली किसान तक खाद पहुंचे

4. खाद की कमी को नियंत्रित किया जा सके

5. पूरे सिस्टम पर निगरानी रखी जा सके

क्या इस व्यवस्था में परेशानी भी है?

हां, परेशानी है। गांवों में कई जगह:-

– इंटरनेट नहीं चलता

– मशीन खराब हो जाती है

– अंगूठा पहचान में समय लगता है

– किसान जल्दी में होता है

इससे लाइन लग जाती है और झगड़े की स्थिति बन जाती है।

लेकिन इसके बावजूद यह व्यवस्था जरूरी है, क्योंकि इसके बिना फिर वही पुरानी गड़बड़ी शुरू हो जाएगी।

निष्कर्ष

डीबीटी(DBT)खाद प्रणाली और आईएफएमएमएस(IFMMS) पोर्टल का मकसद किसी को परेशान करना नहीं है। इसका मकसद है कि खाद सही किसान तक पहुंचे और सरकार का पैसा गलत जगह न जाए।

यह व्यवस्था पूरी तरह सही नहीं है, लेकिन पहले से बेहतर जरूर है।

अगर किसान और दुकानदार दोनों इसे समझ लें, तो परेशानी अपने आप कम हो सकती है।

FAQ – डीबीटी खाद प्रणाली और आईएफएमएमएस से जुड़े सवाल

1. डीबीटी खाद प्रणाली क्या है?

उत्तर:- डीबीटी खाद प्रणाली का मतलब है कि सरकार खाद पर दी जाने वाली सब्सिडी तब देती है, जब किसान सच में खाद खरीद लेता है। बिना बिक्री के सब्सिडी नहीं मिलती।

2. आईएफएमएमएस पोर्टल क्या है?

उत्तर:- आईएफएमएमएस एक सरकारी पोर्टल है, जिसमें खाद का पूरा रिकॉर्ड रखा जाता है – कंपनी से लेकर दुकानदार और किसान तक।

3. पहले सब्सिडी कैसे मिलती थी?

उत्तर:- पहले कंपनियों को पहले ही सब्सिडी मिल जाती थी, चाहे खाद असल में किसान को मिली हो या नहीं। इससे फर्जी बिक्री होती थी।

4. डीबीटी प्रणाली क्यों लाई गई?

उत्तर:-डीबीटी प्रणाली इसलिए लाई गई ताकि फर्जी बिक्री रोकी जा सके और सब्सिडी का पैसा सही जगह पहुंचे।

5. किसान को डीबीटी प्रणाली से क्या फायदा है?

उत्तर:-किसान को सही दाम पर असली खाद मिलती है और यह रिकॉर्ड रहता है कि उसने कितनी खाद खरीदी।

6. दुकानदार को आईएफएमएमएस से क्या फायदा है?

उत्तर:-दुकानदार का स्टॉक और बिक्री का पूरा रिकॉर्ड रहता है, जिससे उस पर गलत आरोप नहीं लगते।

7. कंपनी को इस प्रणाली से क्या लाभ है?

उत्तर:-कंपनी को सही बिक्री का डाटा मिलता है और समय पर सब्सिडी मिलती है।

8. सरकार को इस प्रणाली से क्या फायदा है?

उत्तर:-सरकार को कालाबाजारी रोकने और पूरे सिस्टम पर निगरानी रखने में मदद मिलती है।

9. आईएफएमएमएस पोर्टल पर स्टॉक क्यों दर्ज किया जाता है?

उत्तर:-ताकि यह पता चल सके कि किस जगह कितना खाद स्टॉक है और कहां कमी है।

10. किसान को खाद लेते समय क्या करना होता है?

उत्तर:-किसान को आधार कार्ड और अंगूठे की पहचान से खाद लेनी होती है ताकि बिक्री सही तरीके से दर्ज हो सके।

11. अगर मशीन या इंटरनेट न चले तो क्या होगा?

उत्तर:-ऐसी स्थिति में खाद वितरण में देरी हो सकती है, लेकिन बाद में बिक्री दर्ज करनी होती है।

12. क्या यह व्यवस्था हमेशा के लिए है?

उत्तर:-हां, सरकार धीरे-धीरे पूरी खाद प्रणाली को ऑनलाइन और पारदर्शी बना रही है, इसलिए यह व्यवस्था आगे भी जारी रहेगी।

13. क्या डीबीटी और आईएफएमएमएस से खाद महंगी हो जाएगी?

उत्तर:-नहीं, इससे खाद महंगी नहीं होती, बल्कि गलत तरीके से होने वाली बिक्री बंद होती है।

14. क्या बिना आईएफएमएमएस के खाद बेची जा सकती है?

उत्तर:-नहीं, अब ज्यादातर जगह खाद की बिक्री आईएफएमएमएस और पीओएस मशीन से ही होती है।

15. इस पूरी व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य क्या है?

उत्तर:-इस व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य है कि खाद सही किसान तक पहुंचे और सरकार की सब्सिडी बर्बाद न हो।





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