किसान गलत डोज क्यों डालते हैं? खेती में बहेड़चाल, ज़्यादा दवा और मिट्टी की बिगड़ती सेहत की सच्चाई

 किसान भाई गलत डोज क्यों डालते हैं?

बहेड़चाल, ज़्यादा दवा और मिट्टी की बिगड़ती सेहत – सच्चाई समझिए

किसान गलत डोज क्यों डालते हैं? खेती में बहेड़चाल, ज़्यादा दवा और मिट्टी की बिगड़ती सेहत की सच्चाई


आज खेती में सबसे बड़ी समस्या कीट, रोग या खरपतवार नहीं है, बल्कि गलत सलाह पर आंख बंद करके भरोसा करना है। अगर किसी खाद बीज पर काम करने वाले से पूछो, जो farmer को नज़दीक से देखता हो तोएक बात बहुत साफ़ दिखाई देती है —

न किसान को खुद पर भरोसा है,

न दुकानदार की सलाह पर,

और न ही कृषि विज्ञान पर।

अक्सर किसान वही करता है जो उसका पड़ोसी कर रहा है।

“पड़ोसी ने डाली है, तो मैं भी वही डालूँगा”

यह सोच आज खेती को सबसे ज़्यादा नुकसान पहुँचा रही है।

हर खेत की मिट्टी अलग होती है

हर खेत में कीटों की रेज़िस्टेंस (प्रतिरोधक क्षमता) अलग होती है

हर किसान की सिंचाई, खाद और फसल प्रबंधन की पद्धति अलग होती है

फिर भी किसान बहेड़चाल में चलता है।

अगर किसी किसान को हल्की डोज़ से अच्छा रिज़ल्ट मिल सकता है,

तो वह सिर्फ़ दूसरों को देखकर हेवी डोज़ क्यों डालता है?

डॉक्टर और किसान – एक जरूरी तुलना

जब हम बीमार होते हैं और डॉक्टर के पास जाते हैं, तो डॉक्टर सबसे पहले पूछता है:

“आपने मेरे पास आने से पहले कोई दवाई ली थी क्या?”

क्यों?

क्योंकि:

अगर आपने पहले दवा ली है

तो उसकी डोज़, कंपोज़िशन और असर जानना ज़रूरी है

ताकि आगे का इलाज सही तरीके से किया जा सके

अगर डॉक्टर बिना पूछे दवा बदल दे, तो जान को खतरा हो सकता है।

ठीक यही बात खेती में भी लागू होती है।

खेती में गलत दवा = मिट्टी की बीमारी

अगर किसान बिना जाने,बिना पूछे सिर्फ़ पड़ोसी को देखकर

बार-बार तेज़ और ज़्यादा मात्रा में स्प्रे करेगा- तो:-

❌ मिट्टी अपनी ताकत खो देती है

❌ कीट दवाओं के आदी हो जाते हैं

❌ हर साल डोज़ बढ़ानी पड़ती है

❌ लागत बढ़ती है, मुनाफा घटता है

आज हालत यह है कि:

अब बिना कीटनाशक और खाद के खेती संभव ही नहीं लगती

पहले के समय की खेती क्यों बेहतर थी?

हमारे दादा-परदादा के समय:

खरपतवार नाशक नहीं थे

रासायनिक कीटनाशक नहीं थे

गोबर की खाद का इस्तेमाल होता था

खेत को कुछ समय के लिए खाली छोड़ा जाता था

ताकि मिट्टी खुद को रीसायकल कर सके

 इसी वजह से मिट्टी ज़िंदा थी,

और आज हम ज़मीन को दवाओं का आदी बना चुके हैं।

दुकानदार की सलाह क्यों जरूरी है?

एक अच्छा खाद-बीज विक्रेता:

✔️ आपकी फसल जानता है

✔️ आपकी समस्या समझता है

✔️ पहले से डाली गई दवाओं का हिसाब रखता है

✔️ उसी हिसाब से सही डोज़ बताता है

लेकिन जब किसान:

दुकानदार की बात नहीं मानता

और पड़ोसी की नकल करता है

तो नुकसान किसान का ही होता है।

किसान भाई क्या करें? (समाधान)

1️⃣ हर खेत को अलग समझें

2️⃣ बिना जरूरत हेवी डोज़ न डालें

3️⃣ दुकानदार या कृषि विशेषज्ञ को पूरी जानकारी दें

4️⃣ पहले कौन-सी दवा डाली है, यह ज़रूर बताएं

5️⃣ जैविक खाद और फसल चक्र को दोबारा अपनाएँ

6️⃣ “पड़ोसी क्या कर रहा है” से ज़्यादा

“मेरे खेत को क्या चाहिए” पर ध्यान दें

निष्कर्ष (Conclusion)

👉 जैसे डॉक्टर बिना जानकारी इलाज नहीं करता,

👉 वैसे ही खेती में भी बिना जानकारी दवा नहीं डालनी चाहिए।

सही मात्रा, सही समय और सही सलाह

यही खेती को बचाने का एकमात्र रास्ता है।

अगर किसान आज नहीं समझा,

तो आने वाली पीढ़ियों को सिर्फ़

बीमार ज़मीन और महंगी खेती ही मिलेगी।


FAQs

Q1. किसान गलत डोज क्यों डालते हैं?

A. किसान अक्सर पड़ोसी की नकल, गलत सलाह और जानकारी की कमी के कारण जरूरत से ज़्यादा दवा डाल देते हैं।

Q2. ज़्यादा दवा डालने से मिट्टी को क्या नुकसान होता है?

A. ज़्यादा दवा डालने से मिट्टी की सेहत खराब होती है, लाभदायक जीवाणु मर जाते हैं और उत्पादन घटने लगता है।

Q3. क्या हर खेत के लिए दवा की डोज़ एक जैसी हो सकती है?

A. नहीं, हर खेत की मिट्टी, फसल और कीटों की स्थिति अलग होती है, इसलिए डोज़ भी अलग होनी चाहिए।

Q4. किसान सही डोज़ कैसे तय करें?

A. किसान को अपनी फसल की पूरी जानकारी दुकानदार या कृषि विशेषज्ञ को देकर ही दवा की सही मात्रा तय करनी चाहिए।

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