आज जब कोई किसान खाद लेने दुकान पर जाता है, तो उससे आधार कार्ड और अंगूठे की पहचान मांगी जाती है। कई किसानों को लगता है कि सरकार बेवजह नियम कड़े कर रही है। पहले के समय में केवल पैसे देकर खाद मिल जाती थी, अब इतनी औपचारिकता क्यों हो गई, यह सवाल हर किसान के मन में आता है। लेकिन अगर हम पूरे मामले को समझें, तो पता चलता है कि यह व्यवस्था किसानों के हित में ही बनाई गई है।
पहले क्या स्थिति थी
कुछ साल पहले खाद खरीदते समय कोई पहचान नहीं मांगी जाती थी। दुकानदार खाद दे देता था और किसान लेकर चला जाता था। किसी भी तरह का रिकॉर्ड नहीं बनता था कि किस किसान ने कितनी खाद ली है। इसी कारण कई जगह कालाबाजारी होने लगी। सस्ती सरकारी खाद को ज्यादा दाम पर बेचा जाने लगा। कुछ लोग नकली नाम से खाद उठाकर बाजार में बेच देते थे।
आधार कार्ड क्यों जरूरी किया गया
इस समस्या को रोकने के लिए सरकार ने सबसे पहले खाद लेने के लिए आधार कार्ड अनिवार्य कर दिया। इसका मतलब यह हुआ कि हर किसान की पहचान दर्ज होने लगी। अब यह पता चलने लगा कि कौन सा किसान कितनी खाद ले रहा है। इससे फर्जी नाम से खाद लेने की आदत पर रोक लगी।
अंगूठे की पहचान क्यों शुरू हुई
केवल आधार कार्ड दिखा देने से भी कई जगह गड़बड़ी होने लगी। इसलिए सरकार ने अंगूठे की पहचान शुरू की। अब किसान को मशीन पर अपनी उंगली लगानी होती है। मशीन यह जांच करती है कि आधार कार्ड और व्यक्ति एक ही हैं या नहीं। इससे किसी और के आधार कार्ड से खाद लेने का तरीका बंद हो गया।
फसल पंजीकरण क्यों जरूरी किया गया
इसके बाद सरकार ने फसल पंजीकरण की व्यवस्था शुरू की। इसमें किसान को यह बताना होता है कि उसने किस खेत में कौन सी फसल बोई है, जैसे गेहूं, सरसों, चना, धान या कपास। यह जानकारी सरकारी पोर्टल पर दर्ज की जाती है।
अब सिस्टम यह देखता है कि किसान जिस फसल की खेती कर रहा है, उसी के अनुसार उसे खाद मिल रही है या नहीं। जैसे अगर किसी किसान ने गेहूं बोया है, तो उसे गेहूं की खेती के अनुसार ही यूरिया या डीएपी दी जाएगी। वह जरूरत से ज्यादा खाद नहीं ले सकेगा।
सरकार ने यह व्यवस्था क्यों बनाई
सरकार ने यह व्यवस्था इसलिए बनाई ताकि:
खाद की कालाबाजारी रोकी जा सके।
सरकारी अनुदान का पैसा सही किसान तक पहुंचे।
फर्जी बिक्री और गलत बिलिंग बंद हो।
खाद की कमी की समस्या पर नियंत्रण रखा जा सके।
किसानों को क्या परेशानी होती है
गांव का किसान साधारण सोच रखता है। वह सोचता है कि पैसे दो और खाद ले लो। आधार, अंगूठा और फसल पंजीकरण उसे झंझट लगता है। कई बार वह खेत से सीधे दुकान आ जाता है और आधार साथ नहीं लाता। इंटरनेट या मशीन की खराबी से भी दिक्कत होती है। इस कारण किसान को गुस्सा भी आता है।
फिर भी यह व्यवस्था जरूरी क्यों है
अगर यह व्यवस्था न हो, तो फिर से वही पुरानी समस्या शुरू हो जाएगी। सस्ती खाद महंगी बिकेगी और असली किसान को खाद नहीं मिलेगी। इसलिए यह कहा जा सकता है कि आधार कार्ड, अंगूठे की पहचान और फसल पंजीकरण की व्यवस्था खाद वितरण को सही दिशा में ले जाने का प्रयास है।
निष्कर्ष
यह व्यवस्था पूरी तरह सही नहीं है और इसमें सुधार की जरूरत है। लेकिन इसका उद्देश्य गलत नहीं है। सरकार चाहती है कि खाद सही किसान तक पहुंचे और अनुदान का पैसा बर्बाद न हो। किसान और दुकानदार दोनों को इस व्यवस्था को समझना जरूरी है। जैसे-जैसे लोगों को जानकारी होगी, वैसे-वैसे परेशानी भी कम होगी।
FAQ
1. खाद लेने के लिए आधार कार्ड क्यों जरूरी किया गया है?
उत्तर:-आधार कार्ड इसलिए जरूरी किया गया है ताकि यह पता चल सके कि खाद असली किसान को मिल रही है या नहीं। इससे फर्जी नाम से खाद लेने और कालाबाजारी रोकने में मदद मिलती है।
2. अंगूठे की पहचान (फिंगर वेरिफिकेशन) क्यों की जाती है?
उत्तर:-अंगूठे की पहचान इसलिए की जाती है ताकि कोई दूसरा व्यक्ति किसी और के आधार कार्ड से खाद न ले सके। इससे यह पक्का होता है कि खाद वही किसान ले रहा है जिसका आधार कार्ड है।
3. फसल पंजीकरण क्या होता है?
उत्तर:-फसल पंजीकरण का मतलब है कि किसान सरकार को यह जानकारी देता है कि उसने किस खेत में कौन सी फसल बोई है, जैसे गेहूं, सरसों, धान या कपास।
4. फसल पंजीकरण से खाद पर क्या असर पड़ता है?
उत्तर:-फसल पंजीकरण से यह तय होता है कि किसान को उसी फसल के अनुसार खाद दी जाए। इससे जरूरत से ज्यादा खाद लेने पर रोक लगती है।
5. अगर आधार कार्ड साथ न हो तो क्या खाद नहीं मिलेगी?
उत्तर:-अधिकतर जगह आधार और अंगूठा जरूरी है। बिना आधार के खाद मिलना मुश्किल हो जाता है, क्योंकि अब सारा रिकॉर्ड मशीन और पोर्टल में दर्ज होता है।
6. यह व्यवस्था सरकार ने क्यों बनाई है?
उत्तर:-सरकार ने यह व्यवस्था इसलिए बनाई है ताकि:
कालाबाजारी रुके,सरकारी अनुदान सही किसान तक पहुंचे
फर्जी बिक्री बंद हो,खाद की कमी पर नियंत्रण रखा जा सके
7. क्या इस व्यवस्था से किसानों को नुकसान होता है?
उत्तर:-शुरुआत में किसानों को परेशानी जरूर होती है, लेकिन लंबे समय में इससे उन्हें ही फायदा होता है क्योंकि खाद सही दाम पर और सही मात्रा में मिलती है।
8. क्या पहले वाली व्यवस्था ज्यादा आसान थी?
उत्तर:-पहले व्यवस्था आसान जरूर थी, लेकिन उसमें गड़बड़ी ज्यादा होती थी। अब व्यवस्था थोड़ी कठिन है, लेकिन ज्यादा सुरक्षित और पारदर्शी है।
9. क्या यह व्यवस्था हमेशा के लिए है?
उत्तर:-हां, सरकार धीरे-धीरे पूरी व्यवस्था को ऑनलाइन और मशीन आधारित बना रही है, ताकि भविष्य में खाद की कालाबाजारी पूरी तरह खत्म की जा सके।
10. किसान को इस व्यवस्था में क्या करना चाहिए?
उत्तर:-किसान को चाहिए कि:-आधार कार्ड साथ रखे ,अंगूठे की पहचान करवाए
अपनी फसल का पंजीकरण करवाए ताकि खाद लेने में कोई परेशानी न हो।

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